The Book of Linchpin: Are You Indispensable? | HINDI

ये समरी किस-किसको पढ़नी चाहिए ?

  • एंट्री लेवल एम्प्लोईज़ और मिड लेवल एम्प्लोईज़ 
  • हर कोई जिसे अपनी जॉब में मोटिवेशन चाहिए 

ऑथर के बारे में 

सेठ गोदीन एक बेस्ट सेलिंग ऑथर, ब्लॉगर, ट्रेनर और एंट्रप्रेन्योर है. पहले वो बुक पकेजिंग और डॉट.कॉम बिजनेस में थे और अब वो एक प्राउड ऑथर है जिनकी 19 बिजनेस बुक्स पब्लिश हो चुकी है. सेठ मार्केटिंग वर्कशॉप्स और ऑनलाइन कोर्सेस भी ऑफर करते है. वो अपने ब्लॉग्स के थ्रू लोगो को एजुकेट करते रहते है. 

इंट्रोडक्शन 

मै ऐसे बहुत सारे लोगो को जानता हूँ जो हर रोज़ वो काम करने पर मजबूर है जो उन्हें पसंद नही है. उन्हें इस दुनिया से अपनी असली पहचान, अपनी क्रिएटिविटी छुपानी पड़ती है क्योंकि दुनिया उनके टेलेंट की कद्र नही करती. लेकिन आज दुनिया काफी चेंज हो चुकी है. अब पहले जैसी बात नहीं है. 

ये बहुत पहले से चला आLinchpin: Are You Indispensable रहा है कि दुनिया हमसे उम्मीद करती है कि हम एडजस्ट करे, उनके हिसाब से फिट होने की कोशिश करे, खुद को बदल कर उनके जैसे बने. और ये काफी टाइम से चला आ रहा है लगभग एक सेंचुरी पहले से. लेकिन आज हालात बदल चुके है.

आज अगर आप किसी और कॉपी करोगे तो आपको कोई फायदा नही होने वाला. बल्कि उलटे आपका नुकसान ही होगा. क्या आपने कभी सोचा है कि आप ऑलमोस्ट एक जैसी लाइफ जीते हो. रोज़ अपने काम पर जाते हो जो आप पिछले 15 सालो से करते आ रहे हो. अचानक एक दिन आपका बॉस आपके केबिन के ड़ोर पर नॉक करता है और बताता है कि आपको रीप्लेस किया जा रहा है क्योंकि उन्हें कम सेलरी में कोई और मिल गया है.

तो अब आप क्या करोगे ? मुझे नहीं पता कि ऐसी सिचुएशन में आप कैसे रिएक्ट करोगे ? लेकिन मुझे यकीन है कि आप ये समरी पढ़ोगे तो आपको खुद से पता करने की जरूरत नही पड़ेगी. आप ये भी सीख जाओगे कि हमे मशीन का एक पार्ट बनकर नहीं रहना है जोकि ईजिली रिप्लेस किया जा सकता है बल्कि हमे खुद को एक ऐसी नीड बनाना है जो कोई पूरी ना कर सके.

काम की नई दुनिया

खुद को एम्प्लोयर की जगह रख कर देखो. अब एक्जाम्पल के लिए, आप क्यों किसी प्रोफेशनल बैग डिज़ाइनर को ज्यादा पैसे देकर हायर करना चाहोगे जबकि आप 10 बैग डिज़ाइनर रख सकते हो जो उससे भी कम पैसे में आपको बढ़िया और फ़ास्ट काम करके देंगे? 300 सालो से दुनिया इसी ट्रेंड पर चल रही थी और एम्प्लोयर का इसमें फायदा ही फायदा था पर अब नए जमाने में ऐसे काम नही होता. हेक्टर हर रोज़ सुबह 6 बजे उठ जाता है, फिर अपनी गली के कॉर्नर पर जाकर वेट करता है.

हेक्टर एक कंस्ट्रक्शन वर्कर है. वो रोज़ बाकि 6 और लोगो के साथ जोकि उसी की तरह कंस्ट्रक्शन वर्कर्स है, वहां से गुजरने वाले एक ट्रक का वेट करता है जो उन्हें लेकर जाए. और जब ट्रक आती है तो ड्राईवर विंडो के शीशे नीचे कर लेता है. वो उनमें से सिर्फ 3 लोगो को पिक करता है. उसकी कोई फिक्स चॉइस नही है, उसे जो भी चीप वर्कर लगता है उसे वो अपने साथ ले जाता है. उसके लिए वो सब एक जैसे है.

आप चाहे माने या ना माने आप भी हेक्टर जैसे हो. आप किसी कंपनी में एक जॉब के लिए अपना सीवी भेजते हो. आपका सीवी हज़ारो और लोगो के सीवी के साथ एक डेस्क पर पड़ा रहता है. अब क्योंकि आपमें और उन लोगो में कोई फर्क नहीं है तो अक्सर वो जॉब आपको नहीं मिलती. लेकिन ऐसा क्यों होता है? क्योंकि आप उन लोगो जैसे ही हो. आपमें ऐसी कोई यूनिक बात नहीं है कि एम्प्लोयर आपको कंसीडर करे क्योंकि आप डिफरेंट नहीं हो.

लॉ ऑफ़ मैकेनिकल तुर्क कहता है कि अगर किसी प्रोजेक्ट को छोटे और प्रेडिक्टेबल पीसेस में तोडा जाए तो उसे ऑलमोस्ट फ्री में किया जा सकता है.  अब ज़रा कास्टिंगवर्ड्स. कॉम को ही ले लो. ये वेबसाईट वौइस् रिकॉर्डिंग्स या इंटरव्यूज़ को रिटेन फॉर्म में ट्रांसफॉर्म कर देती है. अब आप पूछोगे कि ये वेबसाईट काम कैसे करती है? दरअसल ये वौइस् रिकॉर्डिंग्स को कई पीसेस में ब्रेक करती है और फिर उन पीसेस को कई सारे एम्प्लोईज़ में डिवाइड कर देती है. हर एम्प्लोई अपना हिस्सा ट्रांस्क्रिब करता है और फिर सारे पार्ट्स कनेक्ट करके फाइनल प्रोडक्ट तैयार होता है.

तो कास्टिंग वर्ड्स हर एम्प्लोई को कितना पे करता होगा? तो हम आपको बता दे कि एक मिनट ट्रांस्क्रिब का रेट 19 सेंट्स है. अब आप इसे हर मिनट के दो डॉलर के हिसाब से कॉम्पेयर करो तो जोकि प्रोफेशनल का रेट है, ये फिर भी काफी सस्ता पड़ेगा. और यहाँ लॉ ऑफ़ मैकेनिकल तुर्क अप्लाई होता है. तो क्लाइंट को हर प्रोजेक्ट पर 80 डॉलर्स खर्च करने के बजाए सिर्फ 15 डॉलर्स खर्च करने पड़ते है.!और इससे भी बुरा है कि ज्यादातर बॉस एम्प्लोईज़ को नेक्स्ट मैकेनिकल तुर्क देखना चाहते है? तो क्या आप ऐसा चाहोगे? आज की दुनिया में उन लोगो की कोई जगह नही है जो सिर्फ मशीन की तरह काम करे. तो ये प्रोब्लम सोल्व कैसे होगी? सिंपल सी बात है, आपको लिंचपिन बनना होगा. 

लिंचपिंस आर्टिस्ट होते है. वो किसी मशीन की तरह तो बिलकुल भी काम नही करते. उन्हें रूल्स में काम करना पसंद नहीं है और सबसे बड़ी चीज़, लिंचपिंस का कोई आल्टरनेट नही होता. जेम्स एक फैक्टरी का मालिक है जहाँ सस्ते कपड़े बनते है. अपने वर्कर्स का इंटरव्यू लेते वक्त उसे रिएलाइज़ हुआ कि उसके पास 3 चॉइस है. या तो वो एक परफेक्ट वर्कर हायर करे जो उसे हर घंटे के हिसाब से 30$ कमा कर दे. या वो एक गुड वर्कर रखे जो 25$ कमा के दे या फिर वो एक एवरेज वर्कर हायर करे जो घंटे के सिर्फ 20$ की कमाई करके दे. 

पर प्रोब्लम ये है कि जेम्स को नहीं पता कि परफेक्ट वर्कर कौन है और एवरेज कौन है जब तक कि वो वर्कर्स को हायर नहीं कर लेता और उन्हें काम नही देता. इसलिए उसे शुरुवात में सबको एक सेट प्राइस देना पड़ेगा. आपको क्या लगता है जेम्स कितना पे करेगा? ज़ाहिर है कि वो 20$ एक घंटे के हिसाब से पे करेगा.  तो जेम्स ने सारे वर्कर्स को सेम अमाउंट पे किया ताकि लिस्ट अमाउंट ऑफ़ प्रॉफिट कम्पंसेट हो सके. यानी परफेक्ट वर्कर्स जितना डिज़र्व करते थे, उससे कम पैसा ले रहे थे.

और कडवी सच्चाई ये है कि परफेक्ट वर्कर्स जल्दी ही काम छोडकर चले जायेंगे. तो इस तरह परफेक्ट वर्कर्स को एक मशीन के पार्ट की तरह ट्रीट करके उन्हें मिसयूज़ किया जाता है. इंसान अपने करियर में इसलिए नहीं जाना जाता कि वो क्या है बल्कि इसलिए जाना जाता है कि वो क्या करता है. अगर हम इंडीसपेंसेबल बनना चाहते है तो हमे डिफरेंट बनना ही पड़ेगा. आपको अपने काम में वो वैल्यू और ईमोशंस लाने होंगे जो कस्टमर्स और एम्प्लोयर्स को चाहिए. कहने का मतलब है कि आपको लाखो की भीड़ में स्टैंड आउट करना है और डिफरेंट बनकर दिखाना है ताकि लोग आपको नोटिस करे.

थिंकिंग अबाउट योर चॉइस

खुद से एक सवाल जरूर करो. क्या आप इंडीसपेंसेबल हो? 

चलो, इसका जवाब देते है. हाँ आप बन सकते हो. और आपको बता दे कि कई और लोग भी है जो इंडीसपेंसेब्ल है. और ये जानना भी ज़रूरी है कि वो सब लोग किसी सुपरपॉवर के साथ पैदा नही हुए है कि जो उन्हें इंडीसपेंसेब्ल बनाये. बल्कि उन्होंने इसके लिए काफी मेहनत की है. ये लोग डिस्पेंसेबल लोगो की इस दुनिया में अपनी मेहनत से इंडीस्पेंसेबल बने है. आपके पास दो चॉइस है.

या तो आप ये सोचो कि लाइफ में सक्सेसफुल होने के लिए किसी को तो हारना ही होगा या फिर आप वो इन्सान बन सकते हो जो हमेशा विन –विन सिचुएशन के बारे में सोचे. किम बेरी प्रोग्राम्स गिल्ड के लीडर है. वो कांग्रेस को प्रेशर करते रहे थे कि फॉरेन टेलेंटेड कंप्यूटर प्रोग्रामर्स को एच-1बी वीज़ा लिमिट नंबर में दिए जाए.

किम लाइफ को विन-लूज़ सिचुएशन में लेते है. उन्हें लगता है कि हर फोरेनर जो प्रोग्रामर्स के तौर पर यू.एस. में काम करता है, उसकी वजह से अमेरिकंस के चांसेस कम हो जाते है. पर हम लाइफ को विन-विन सिचुएशन की तरह क्यों नही ले सकते? क्यों नही हम मार्किट को अनलिमिटेड और एक्सपेंडेबल की तरह देखते? वो ये क्यों नही सोचते कि अगर फोरेनर्स को डेवलपर्स जॉब मिल रही है तो वो कुछ अच्छा ही क्रिएट करेंगे और इससे लोकल टेलेंट्स को भी और ज्यादा अपोर्च्यूनिटीज़ मिलेंगी?  आपको लगता होगा कि सक्सेसफुल लोगो के पास कुछ एक्स्ट्रा काबिलियत होती है, ऐसा कुछ जो आपके पास नही है.

पर ऐसा नही है. स्टीव जॉब्स अडॉप्टेड थे. नेल्सन मंडेला ने जेल के अंदर से ही पूरी दुनिया चेंज कर दी थी. और भी बहुत से लोग ऐसे है जिनके पास कुछ नही था फिर भी उन्होंने सक्सेस अचीव की. कभी अमेकिन ड्रीम हुआ करता था ”वर्क हार्ड, डू एज यूं आर आस्कड टू, एंड यूं आर गोइंग टू गेट रीवार्डेड” “यानी मेहनत करो और जो बोला जाये वही करो तभी आपको रीवार्ड मिलेगा’ लेकिन अब ये बात नहीं रही. अब न्यू अमेरिकन ड्रीम है” बी डिफरेंट, क्रिएट वैल्यू, बी पैशनेट, एंड यू आर गोइंग टू गेट रीवार्डेडे” लिंचपिन बनो, वो बनो जिसे कंपनी ईजिली रीप्लेस ना कर सके और यही आपका सबसे बड़ा रीवार्ड होगा.

जब आप लिंचपिन बनते हो तब आप अपने जॉब को और भी पैशन के साथ एन्जॉय करते हो क्योंकि आप अपने कस्टमर्स से कनेक्ट रहते हो. और अगर आप एम्प्लोयर हो तो लिंचपिंस को हायर करो.

आपके ख्याल से कौन आपको ज्यादा प्रॉफिट कमा के देगा? वो जिसे जो बोला जाए, बिना सोचे एक्जेक्टली वही करे या वो जो आर्ट क्रिएट करे, जो अपनी जॉब को लेकर पैशनेट हो और ऐसे प्रोडक्ट्स बनाये जिससे कस्टमर्स इमोशनली कनेक्ट हो सके? साथ ही जब आप लिंचपिंस हायर करते हो तो आपका बिजनेस भी एक लिंचपिन बन जाता है.

यानी एकदम यूनीक, और ये लोगो को एक बड़े स्केल पर आपस में कनेक्ट करने में हेल्प करता है. लिंचपिन एम्प्लोईज़\ वैल्यू क्रिएट करते है. जितना उन्हें पे किया जाता है, वो उससे कैन ज्यादा प्रोड्यूस करते है. इन्हें अपने काम से प्यार होता है. ये लोग फ्री स्पिरिट्स होते है जो हर काम परफेक्ट करते है. एक एम्प्लोयर के तौर पर अगर आपको लिंचपिंस चाहिए तो आपको भी एक लिंचपिन बनना पड़ेगा.

 

बीकमिंग द लिंचपिन (लिंचपिन बनना)

लिंचपिंस हर ऑर्गेनाइजेशन की नीड है. ये ऑर्गेनाइजेशन को जोड़ कर रखते है, इनके बिना कंपनी आगे नही बढ़ सकती. आप अपनी जॉब में जितना ज्यादा वैल्यू क्रिएट करोगे उतना ही कम टाइम आपको जॉब में स्पेंड करना पड़ेगा. यही है लॉ ऑफ़ लिंचपिन लेवरेज. यानी आपको दिन भर में सिर्फ कुछ मिनट्स ही क्रिएटिव और एक्स्ट्राओर्डीनेरी करना होता है. बाकी टाइम आप बाकियों की तरफ सिर्फ नॉर्मल स्टफ करते हो, क्रिएटिविटी वो छोटी सी चीज़ है जो आपके पूरे काम को शेप देती है.

यानी टास्क को और भी आसान और कस्टमर्स के साथ और ज्यादा कनेक्टेड बनाती है. और फिर धीरे-धीरे आपको अर्निंग भी बढती जाती है. मैरिस मायेर (Marissa Mayer) उन लोगो में है जिन्होंने गूगल को एक शेप देने में और डेवलप करने में हेल्प की है. वो लिंचपिन का एक परफेक्ट एक्जाम्पल है. मरिसस अपने जॉब में वैल्यू क्रिएट करना जानती थी. उसने यूजर इंटरफेस क्रिएट करने के लिए अपने आर्ट का यूज़ किया जो कस्टमर्स के साथ इमोशनली कनेक्ट कर पाया.

उनकी वजह से ही लोग बाकि सर्च इंजन जैसे याहू या बिंग के मुकाबले गूगल को पसंद करते है. हालाँकि बाकि सर्च इंजन भी सेम सर्च रीजल्ट प्रोवाइड करते है. मरिसा जानती थी कि ऑप्टीमल सर्च रीज्ल्ट्स इम्पोर्टेंट है लेकिन मोस्ट इम्पोर्टेंट नही. उन्हें मालूम था कि प्रोग्रामर्स के साथ कस्टमर्स नीड को कैसे कनेक्ट किया जाना है, धीरे-धीरे उन्होंने एक यूजर इंटरफेस क्रिएट किया जो आज वर्ल्ड में सबसे बेस्ट है.मान लो, आपका एक रेस्ट्रोरेन्ट है जहाँ चार वेटर्स काम करते है.

उनमे से तीन अपना काम परफेक्ट करते है जबकि चौथा ठीक-ठाक काम करता है. हालाँकि ये चौथा वेटर डेली की प्रोब्लम्स हैंडल करना जानता है तो अगर किसी दिन उन एम्प्लोईज़ को निकालने की नौबत आ जाये तो आप किसको निकालोगे और किसको रखोगे? ज़ाहिर है आप प्रोब्लम सोल्वर को तो बिलकुल नही निकालोगे. प्रोब्लम सोल्व करना किसी की भी जॉब का एक पार्ट है. और ये चीज़ ना तो सिखाई जा सकती है और ना ही एक्सप्लेन की जा सकती है.

क्योंकि ये चीज़ एक्सपीरिएंस से आती है. जैसे कि डॉक्टर अचानक रुक कर अपने पेशेंट्स से बात करे या उनकी बात सुने, उनकी नीड्स को समझे. या एक बरिस्ता खुद से जाकर कस्टमर्स से जाके पूछे कि उनका दिन कैसा रहा. या फिर एक पायलट अपने कॉकपिट से निकल कर रोते हुए बच्चे को चुप कराये.

आपका एक छोटा सा स्वीट जेस्चर भी आपके बारे में लोगो की राय बदल सकता है. ये आपको एक लिंचपिन बना सकता है. इसलिए अपने काम  से वक्त निकाल कर लोगो की बात सुनो, उनकी केयर करो, उनकी नीड्स का ध्यान रखो. इसमें आपका क्या जायेगा अगर आप कुछ पल रुककर लोगो से इमोशनली कनेक्ट कर सको और उन्हें इम्पोर्टेंट फील करा सको?

द रेसिस्टेंस

अगर आप कोई मास्टरपीस क्रिएट करे तो ? ऐसा आर्ट जो पहले किसी ने ना देखा हो, लेकिन आपके जो रेजिस्टेंस है वो आपको रोक लेता है.? लेकिन इसका फायदा क्या हुआ? कुछ भी नही. इसीलिए क्रिएटिंग की तरह शिपिंग भी इम्पोर्टेंट है. जब आप फर्स्ट टाइम शिपिंग एडाप्ट करने की कोशिश करते हो, तो कभी आपका काम गडबड भी हो सकता है. लेकिन ये नॉर्मल चीज़ है. अब जैसे एक्जाम्पल के लिए, सेटरडे नाईट लाइव. इसके नाम में ही शिपिंग प्रोसेस है. ये शो हर सेटरडे रात आता है चाहे काम हुआ हो या नहीं. अगर ऑनेस्टली बोले तो कभी-कभी ये शो बेहद खराब होता है पर वो लोग इसे रोकते नही है.

शो चलता रहता है और फिर नेक्स्ट सेटरडे ऑडियंस को काफी बढ़िया परफोर्मेंस मिलती है. इसलिए आप जो भी करो उसकी शिपिंग करते रहो. पर शिपिंग इतनी हार्ड क्यों है? क्यों कुछ प्रोजेक्ट्स शिपिंग में फेल हो जाते है? ये दो बड़े चेलेन्जेस की वजह से होता है. पहला है थ्रेशिंग और दूसरा है कोर्डीनेशन. और दोनों के पीछे की वजह है रेजिस्टेंस. थ्रेशिंग का मतलब है किसी बड़े प्रोजेक्ट में स्माल डिटेल्स एड करके उसे ठीक करना या बैटर बनाना.

मान लो एक कंपनी कोई गेम डेवलप करती है. तो अब अगर आप क्लोजली देखे तो जितना डेडलाइन पास आती जाती है, थ्रेशिंग शुरू हो जाती है. इस बात को गलत मत समझो? हमारे कहने का ये मतलब नहीं है कि थ्रेशिंग बिलकुल नही होनी चाहिए. हालाँकि इसका भी एक राईट टाइम और जगह है. इसलिए थ्रेश जल्दी करो और अपना प्रोडक्ट भी जल्दी फिक्स करो. थ्रेशिंग जितनी जल्दी हो उतना ही सबके लिए अच्छा है. कोर्डीनेशन एक और चेलेंज है. जैसे कि आप अगर तीन लोगो को आपस में इंट्रोड्यूस कर रहे हो तो सिर्फ तीन बार हैण्डशेक होगा पर एक और आदमी जोड़ देने से सिक्स हैण्डशेक हो जायेंगे. एक और एड करो तो आपको टेन हैण्डशेक मिलेंगे. 

अक्सर स्टार्ट-अप बिजनेस बड़ी कंपनीयों से ज्यादा सक्सेसफुल क्यों होते है, इसके पीछे भी रीजन है. स्टार्ट-अप के एम्प्लोईज कम होने की वजह से आपस में कोर्डीनेशन भी ईज़ी हो जाता है. लेकिन रेजिस्टेंस का रीजन का क्या है?  रेजिस्टेंस बेसिकली “लिजार्ड ब्रेन” है. ये तुम्हारे ब्रेन के अंदर होता है, हमेशा डरा हुआ और भूखा. आपका लिजार्ड ब्रेन सिर्फ सर्वाइव करना चाहता है. इसे कोई फर्क नही पड़ता आप सक्सेसफुल है या नही. इसे बस जिंदा रहना है.

यही चीज़ रेजिस्टेंस है. आपका लिजार्ड ब्रेन आपको आगे बढने से रोकता है. इसके ठीक अपोजिट हमारा डेमॉन ब्रेन होता है, लैटिन में डेमॉन का मतलब है जीनियस. हम सबके अंदर एक जीनियस है जो हमेशा रेजिस्टेंस से लड़ता है. आप सक्सेसफुल होंगे या नहीं होंगे ये डिपेंड करता है कि आपके अंदर कौन जीतेगा, आपका लिजार्ड ब्रेन या इनर डेमॉन? लेकिन इस लिजार्ड ब्रेन से छुटकारा कैसे पाए? इसे कैसे बीट किया जाए? काफी सिंपल है. अपनी डेडलाइन लिख लो.

एक बड़े पेपर पर लिखकर दिवार पर टांग दो. ये फर्स्ट और मोस्ट इम्पोर्टेंट स्टेप है फिर चाहे जो भी हो, उस दिन आप जरूर शिपिंग करोगे चाहे आपने कम फिनिश किया हो या नहीं. सेकंड स्टेप: हर सिंगल आईडिया जो तुम्हे आये उसे लिख लो. चाहे पोस्टकार्ड लिखो, या स्माल नोट्स में पर जो भी माइंड में आये लिख लो. लोगो की हेल्प करो और जरूरत पड़े तो उनकी हेल्प भी लो. नेक्स्ट क्या है? थ्रेश. आज और अभी थ्रेश करो, डेडलाइन का वेट मत करो. हालाँकि ये मुश्किल होगा क्योंकि ये आपके लिजार्ड ब्रेन के लिए एक चेलेंज है. डेडलाइन अभी दूर है और लिजार्ड ब्रेन को अभी कुछ भी करने का मूड नही है. 

लिजार्ड ब्रेन को कंट्रोल में करने के लिए जो कुछ माइंड में आता है, उसे कार्ड्स में लिख लो और अपने कलीग्स को भी लिखने को बोलो. फिर उन सारे कार्ड्स को एक डेटाबेस जैसे फाइल मेकर प्रो में ऑर्गेनाइज़ करो और अपने पार्टनर्स को क्लियरली एक्सप्लेन करो कि ये थ्रेश करने का आपका लास्ट चांस है. और बेशक डेडलाइन अभी दूर है पर ये उनका लास्ट चांस होगा आईडियाज़ के बारे में सोचने का. फिर ये आउटलाइन सिर्फ अपने बॉस के पास लेकर जाओ.

इसे सिर्फ उस इन्सान के पास ले जाओ जो ये डिसाइड करेगा कि फाइनल प्रोडक्ट कैसा होना चाहिए. बॉस से पूछो कि क्या उसे आउटलाइन ठीक लगी और अगर नही तो उन्हें क्या चेंजेस चाहिए? लास्ट में उनसे ये सवाल पूछो. एक बार आप डिलीवरी कर लो तो उन्हें और क्या चाहिए, क्या वो अब शिप करेंगे? अगर वो रिफ्यूज करे तो मत सुनो. अगर वो बोले” हम फाइनल प्रोडक्ट देखने के बाद ही डिसाइड करेंगे” तो एक्सेप्ट मत करो. उन्हें बताओ कि वो आपको अभी हाँ या ना में जवाब दे. फाइनली, अपना प्रोडक्ट थ्रेश फ्री बिल्ड करो और राईट टाइम पर शिप कर दो. क्योंकि लिंचपिंस भी यही करते है.

यह भी पढ़ें.

द सेवन एबिलिटीज ऑफ़ द लिंचपिन लिंचपिन की सेवन एबिलिटीज़

सबसे पहले तो अपनी ऑर्गेनाइजेशन में एक स्ट्रोंग कनेक्शन बिल्ड करो. लिंचपिन कंपनीज़ को ऐसे लोग नहीं चाहिए जो सिर्फ पैसे के लिए काम करे. उन्हें ऐसे वर्कर्स चाहिए जिनके पास जॉब करने का एक राईट रीज़न है. इसका एक बहुत बड़ा एक्जाम्पल है ज़प्पोस शू कंपनी. कंपनी में जॉब छोड़ने वाले एम्प्लोई को $2,000 का ऑफर दिया जाता है. इसके पीछे ज़प्पोस का मकसद यही है कि उनके वर्कर्स राईट रीज़न के लिए काम करे नाकि पैसे के लिए. लेकिन अगर कोई एम्प्लोई सिर्फ पैसे के लिए काम कर रहा है तो ज़प्पोस उससे $2,000 लेकर उसे तुरंत जॉब छोड़ने के लिए बोल देगी. ज़प्पोस अपने एम्प्लोईज़ को क्रिएटिव देखना चाहती है, उन्हें लिंचपिन बनाना चाहती है. सेकंड, डिलीवर यूनिक क्रिएटिविटी

अपनी यूनिक क्रिएटिविटी डिलीवर करो यूनिक क्रिएटिविटी का कोई एंड नहीं है. आप हमेशा कुछ ना कुछ ऐसा कर सकते हो जो पहले किसी ना किया हो, जो एकदम यूनिक हो पर याद रखो जो भी करो उसे टाइम से डिलीवर करो. अपनी यूनिकनेस और क्रिएटिविटी को डिलीवर करना मत भूलो. थर्ड है किसी भी सिचुएशन मैनेज करना या काम्प्लेक्स इश्यूज को हैंडल कर पाना. अगर प्रोब्लम सोल्विंग का कोई मैन्युअल होता तो शायद हमारी लाइफ में कभी प्रोब्लम ही नहीं होती.

इसीलिए तो हर ऑर्गेनाइजेशन के लिए लिंचपिन बेहद इम्पोर्टेंट है. एक लिंचपिन बनने के लिए आपको हर प्रोब्लम हैंडल कानी होगी. ऐसी प्रोब्लम्स भी जो अनएक्स्पेकटेड होती है. फ़ोर्थ, लीड कास्टमर्स यानी कस्टमर्स को लीड करो .अपने कास्टमर्स के साथ इमोशनली कनेक्ट रहो और उनकी नीड को लेकर फ्लेक्सीबल बनो. अपने हर कस्टमर को एक यूनिक एक्सपीरिएंस दो जो डायरेक्ट उनके इमोशंस को टच करे. 

फिफ्थ, इंस्पायर योर स्टाफ (अपने स्टाफ को इंस्पायर करो) Fifth, inspire your staff.डर दिखाके काम नहीं कराया जा सकता. आप अपने एम्प्लोईज़ को ये कहकर नही डरा सकते कि क्रिएटिव बनो वर्ना तुम्हे निकाल दिया जाएगा. डराने का तरीका कभी काम नही करता.

आपको उन्हें इंस्पायर करना होगा, और इसके लिए आप उन्हें अपना असली टेलेंट शो करने का मौका दो. उन्हें लगना चाहिए कि उनका काम मैटर करता है और वो कंपनी का एक इम्पोर्टेंट पार्ट है, और सिर्फ आप ही उन्हें ये चीज़ फील करा सकते हो. सिक्स्थ, प्रोवाइड डीप डोमेन नॉलेज (डीप डोमेन नॉलेज प्रोवाइड कराओ) Sixth, provide deep domain knowledge.आप चाहे कितने भी नॉलेजेबल क्यों ना हो, जरूरी नहीं कि इससे आपको लिंचपिन बनने में मदद मिले.

क्योंकि हमारे पास चाहे कितनी भी नॉलेज क्यों ना हो, फिर भी ऐसा बहुत कुछ है जो हमे मालूम नहीं होगा. वैसे भी आजकल इंटरनेट से हर नॉलेज मिल जाती है. इसीलिए नॉलेज के साथ हमारे अंदर स्मार्ट डिसीजन लेने की एबिलिटी भी होनी चाहिए. सेवंथ, हैव अ यूनीक टेलेंट

आपके अंदर कोई न कोई यूनिक टेलेंट होना चाहिय्रे

कभी आपने सोचा है कि आपके पास क्या यूनीक है? ऐसा क्या है जो आपकी सुपरपॉवर बन सकता है., अगर नहीं पता तो डिस्कवर करो. हम यहाँ एवरेज पॉवर्स की बात नही कर रहे जैसे ऑर्डर्स या रूल्स फोलो करने की एबिलिटी. बल्कि हम यहाँ उन स्किल्स की बात कर रहे है जो आपको औरों हटकर बनाती है. एक ऐसी क्वालिटी जो सिर्फ आपके अंदर हो. और जब आप ऐसी कोई क्वालिटी अपने अंदर डेवलप करोगे तो आपको रीप्लेस करना मुश्किल होगा. क्योंकि आप जैसा कोई और होगा ही नहीं. 

एक बार और याद दिला दे कि हर कोई यूनिक टेलेंट के साथ नहीं पैदा होता पर हम अपना टेलेंट डेवलप कर सकते है. इसे हम अचीवमेंट बोल सकते है. लिंचपिंस सुपरपॉवर्स के बारे में जानते है और अपने अंदर सुपरपॉवर डेवलप करने के लिए पूरी मेहनत भी करते है, और लिंचपिंस और नॉर्मल लोगो के बीच यही सबसे बड़ा फर्क है. अपनी उन क्वालिटीज़ पर मेहनत करो जो आपको लिंचपिन बनाती है. उन्हें डेवलप करो. और भी बैटर और यूनिक बनने की कोशिश करो.

व्हट इफ माई बॉस वोंट लेट मी ?

इसमें दो सिचुएशंस होती है. पहली तो ये कि आप उस जगह पे हो जहाँ आपका बॉस आपको लिंचपिन नहीं बनने देगा. वो आपको क्रिएटिव बनने का चांस नहीं देगा बल्कि आपसे वही करवाएगा जो वो चाहता है यानी वो सिर्फ आपको ऑर्डर्स देगा जो आपको फोलो करने है. लेकिन ऐसी पोजीशन में आप अपना टाइम क्यों वेस्ट कर रहे हो? क्या आपको सीखने का और ग्रो करने का मौका मिल रहा है ? अगर नहीं तो डेफिनेटली आप इस जॉब में कभी खुश नहीं रहोगे.

आप ये पोजीशंस डिज़र्व ही नहीं करते इसलिए ऐसी जॉब को छोड़ना ही बैटर होगा. दूसरी सिचुएशन जो मोस्ट कॉमन है, वो ये कि आप सोचते हो कि आपका बॉस आपको लिंचपिन नहीं बनने देगा. लेकिन रियल में आपने लिंचपिन बनने की कोशिश ही नहीं की है क्योंकि आप ऐसा करने से बेहद डरते हो. ये सच है कि आपका बॉस आपको सेव नहीं करने वाला.

जब हायर बॉस आपके किसी काम को लेकर सवाल पूछेगा तब आपके बॉस को ही आंसर देना पड़ेगा. इसलिए हमे पहले बॉस को अपना प्लान सेल करना होगा. उन्हें अपने कांफिडेंस में लेना बड़ा जरूरी है. तो इसके लिए आपको क्या करना होगा? सिंपल है, आप अपनी स्किल्स इम्प्रूव करो. जितना हो सके एक्सपीरिएंस गेन करो. और जब रियल टेलेंट शो करने का टाइम आएगा, आपके पास काफी एक्सपीरिएंस होगा. और आपके पास अपने टास्क कर

इसमें दो सिचुएशंस होती है. पहली तो ये कि आप उस जगह पे हो जहाँ आपका बॉस आपको लिंचपिन नहीं बनने देगा. वो आपको क्रिएटिव बनने का चांस नहीं देगा बल्कि आपसे वही करवाएगा जो वो चाहता है यानी वो सिर्फ आपको ऑर्डर्स देगा जो आपको फोलो करने है. लेकिन ऐसी पोजीशन में आप अपना टाइम क्यों वेस्ट कर रहे हो? क्या आपको सीखने का और ग्रो करने का मौका मिल रहा है ? अगर नहीं तो डेफिनेटली आप इस जॉब में कभी खुश नहीं रहोगे. आप ये पोजीशंस डिज़र्व ही नहीं करते इसलिए ऐसी जॉब को छोड़ना ही बैटर होगा.


दूसरी सिचुएशन जो मोस्ट कॉमन है, वो ये कि आप सोचते हो कि आपका बॉस आपको लिंचपिन नहीं बनने देगा. लेकिन रियल में आपने लिंचपिन बनने की कोशिश ही नहीं की है क्योंकि आप ऐसा करने से बेहद डरते हो.
ये सच है कि आपका बॉस आपको सेव नहीं करने वाला. जब हायर बॉस आपके किसी काम को लेकर सवाल पूछेगा तब आपके बॉस को ही आंसर देना पड़ेगा. इसलिए हमे पहले बॉस को अपना प्लान सेल करना होगा. उन्हें अपने कांफिडेंस में लेना बड़ा जरूरी है.


तो इसके लिए आपको क्या करना होगा? सिंपल है, आप अपनी स्किल्स इम्प्रूव करो. जितना हो सके एक्सपीरिएंस गेन करो. और जब रियल टेलेंट शो करने का टाइम आएगा, आपके पास काफी एक्सपीरिएंस होगा. और आपके पास अपने टास्क करने के लिए और भी ज्यादा कण्ट्रोल और टाइम होगा.
इसलिए ये कभी मत पूछो कि कंपनी आपके लिए क्या करेगी बल्कि ये सोचो कि आप किस तरह कंपनी के लिए एक वैल्यूएबल एसेट बन सकते हो.

ने के लिए और भी ज्यादा कण्ट्रोल और टाइम होगा. इसलिए ये कभी मत पूछो कि कंपनी आपके लिए क्या करेगी बल्कि ये सोचो कि आप किस तरह कंपनी के लिए एक वैल्यूएबल एसेट बन सकते हो.

कनक्ल्यूजन

आज के वर्कप्लेस की सिचुएशन को देखते हुए लिंचपिन होना बड़ा जरूरी है. आज के टाइम में कोग्स के लिए कोई जगह नहीं है जो सिर्फ ऑर्डर्स फोलो करे. आपको सर्वाइव करने के लिए लिंचपिन बनना ही होगा. 

अगर आप इन्डीसपेंसेबल नहीं हो तो ऐसा भी हो सकता है कि एक दिन आप उठो और आपको पता चले कि आपको रीप्लेस कर दिया गया है. कंपनी ने किसी ऐसे बंदे को रख लिया है जो आपसे कम सेलरी ले रहा है. और यकीन मानो ऐसा करने में आपके बॉस को कोई प्रोब्लम नहीं होगी. 

वही दूसरी तरफ अगर आप लिंचपिन है तो अपनी कंपनी के लिए आप एक वैल्यूएबल एसेट है. आपकी जगह किसी और को देना इतना ईजी नही होगा क्योंकि आप उन गिने-चुने लोगो में से हो जिन पर कंपनी टिकी है. इस बुक के हिसाब से एक लिजार्ड ब्रेन होता है और हम सबके अंदर एक डेमन मौजूद है.

ये लिजार्ड ब्रेन किसी भी तरह सर्वाइव करना चाहता है. आप चाहे सक्सेसफुल हो या ना हो, इसे फर्क नही पड़ता. लिजार्ड ब्रेन रिस्क लेने से डरता है और यही इसकी सबसे बड़ी वीकनेस है. दूसरी तरफ हमारे अंदर का डेमन हमे प्रोवोक करता है. ये हमे रिस्क लेने के लिए एंकरेज करता है ताकि हम इंडीसपेंसेबल बन सके. अब आप डिसाइड करो कि जीत किसकी होगी? आपके लिजार्ड ब्रेन की या आपके अंदर के डेमन की ? इस बुक में आपने लिंचपिन की सेवन एबिलिटीज़ के बारे में जाना. पहला: सिर्फ पैसे के लिए काम मत करो. दूसरा: क्रिएटिव वर्क डिलीवर करो.

तीसरा: डिफिकल्ट टाइप के लोगो से डील करना सीखो और चौथा: अपने कास्टमर्स से कनेक्ट रहो. फिफ्थ: ये देखो कि आपकी जॉब का क्या इम्पैक्ट पड़ता है. छठा: स्मार्ट डिसीजन लो और सातंवा: अपनी एक यूनिक स्किल डेवलप करो. कोई भी कंपनी अपने एम्प्लोईज़ पर रातो-रात यकीन नहीं करती. ट्रस्ट एक ऐसी चीज़ है जो हमे अर्न करनी पड़ती है साथ आप आपका एम्प्लोयर तब तक रिस्क क्यों लेगा जब तक कोई सॉलिड रीजन ना हो.

यानी आपको पहले खुद को प्रूव करके दिखाना होगा. ये मत पूछो कि कंपनी आपके लिए क्या कर सकती है बल्कि पहले ये सोचो कि आप कंपनी के लिए क्या कर सकते हो. और यही चीज़ है जो हमे एक लिंचपिन बनाती है. 

इस समरी से आप क्या सीखोगे ?

अगर किसी दिन आपकी जॉब छूट जाए तो क्या होगा? आप क्या करोगे अगर कंपनी आपकी जगह कम सेलरी में किसी और को रख ले ? तब आप क्या करोगे ? तभी तो हम आपको इंडीसपेंसेबल होने को बोल रहे है. ये बुक आपको अपनी कंपनी के लिए एक ऐसा वैल्यूएबल इंडीविजुअल बनना सिखाएगी जिसे कोई रिप्लेस ना कर सके. 

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