The Book of Joy – This Interesting book by Dalai Lama

The Book of Joy –  This Interesting book by Dalai Lama

 

दो लफ़्ज़ों में

 2016 में लिखी The Book of Joy नाम की इस किताब को पढ़ कर हम समाज के निरंतर बदलते माहौल में घटती खुशियाँ और बढ़ते स्ट्रेस के लड़ कर अपने लिए चैन और सुकून प्राप्त करने का मार्ग जान सकते हैं. दलाई लामा और डेस्मंड टूटू जैसे शांति दूतों की कलम से लिखी ये किताब वास्तव में आपको अपने और दूसरों के लिए खुशियाँ ढूंडने में मददगार साबित होगी. ये किसके लिए?

  • – जिन्हें बुद्धिज़्म के सिद्धांतों में दिलचस्पी है.
  • – जो जीवन में खुशियों की तलाश में भटक रहे हैं.
  • – जो अपने रिश्तों में एक नयी मधुरता लाना चाहते हैं.

लेखक के बारे में

तिब्बतियों के धर्म गुरु दलाई लामा और दक्षिण अफ्रीका के धर्म अध्यक्ष डेस्मंड टूटू दोनों ही शांति के दूतों के रूप में विश्व में जाने जाते हैं. दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए उनके द्वारा किये गए अथक प्रयासों के कारण उन दोनों को नोबेल पुरस्कार से भी नवाजा गया. दोनों ही धर्म के अनुयायियों ने धर्म और शांती के लिए बहुत सी अनमोल किताबें लिखी है जो दुनिया में कई लोगों के मार्गदर्शन का साधन बनी.

द बुक ऑफ़ जॉय किताब असल में दोनों धर्म गुरुओं की सात दिन चली वार्ता का नतीजा है जिस दौरान उन्होंने समाज में बढती अराजकता और घटते सुकून के बारे में बात की.  

ये किताब आपको क्यूँ पढनी चाहिए? आज के बदलते परिपेक्ष में खुशियों की खोज करिए.

आज की बदलती और दौड़ती हुई ज़िन्दगी के दामन से खुशियाँ ढूढ़ना बहुत मुश्किल हो गया. निरंतर बढ़ता तनाव हमारे रिश्तों और मानसिकता दोनों में झलकता है, इसलिए आध्यात्मिकता की राह पर चलना आजके बदलते परिपेक्ष्य में निहायती आवश्यक हो गया है.

जिंदगी को खुशियों और प्यार से भरने की राह पर पहला कदम रखने की प्रेरणा देने के लिए दलाई लामा और धर्म गुरु डेस्मंड टूटू के शब्दों से अच्छा क्या हो सकता है. इस किताब के सबकों को जीवन में उतार कर अपने जीवन में नयी उमंग को महसूस करने के लिए तैयार हो जाईये. The Book of Joy

इससे आप ये भी जानेंगे

  • – क्यूँ खुशियों को महसूस करने के लिए गम से रूबरू होना भी ज़रूरी है.
  • – कैसे दूसरों को माफ़ कर देना आपको उमंग और खुशियाँ दे सकता है.
  • – अपनेपन और दयालुता की राह पर चलकर कैसे आप अपने अन्दर और बहार खुशियाँ फैला सकते हैं.

दुःख के बिना सुख का कोई मोल नहीं है.

जब एक औरत माँ बनती है तो उसे अपनी ज़िन्दगी का सबसे तकलीफदेय और दर्द भरा पल जीना पड़ता है, लेकिन उस दर्द के बाद की जो ख़ुशी मिलती है उससे हम सब अवगत हैं. इसलिए लेखक कहते हैं की जहाँ एक ओर दर्द हमें तोड़ देता है वहीँ दूसरी ओर अगर देखा जाए तो दर्द के एहसास के बिना खुशियों का भी कोई मोल नहीं रह जाएगा, क्यूंकि जब दर्द के मंजर के बाद खुशियाँ आती है तो उसका महत्व दुगना हो जाता है.

अगर जिंदगी में दर्द के महत्व को समझना है तो हम महात्मा गाँधी को ले सकते हैं, अंग्रेजों द्वारा किये गए अत्याचारों के वाबजूद भी वो टूटे नहीं और ना ही उनके मन में कोई हिंसा की भावना आई, बल्कि अत्याचारों के दर्द ने आज़ादी के प्रति उनके इरादे को और मजबूत कर दिया.

कई लोग कहते है जिंदगी में हर दर्द का इलाज़ है. लेकिन ऐसा नहीं है असल में बिना दर्द के ज़िन्दगी में किसी और भावना का कोई अस्तित्व ही नहीं. बिना दर्द के न हम खुशियों का एहसास कर सकते हैं न प्यार का. लेकिन हम दर्द को मिटा नहीं सकते लेकिन उसके एहसास को सकारात्मक जरुर बना सकते हैं, इसके लिए जरुरत है अपना ध्यान अपने दर्द से हटा कर दूसरों के दर्द की ओर लगाने की. बौद्ध धर्म की लोजोंग (Lojong) नाम की शिक्षा पद्धती में भी कुछ ऐसा ही लिखा है कि दूसरों के दर्द की तरफ देख व्यक्ति अपना दर्द भूल जाता है.

लोजोंग (Lojong) में लिखी इस बात को दलाई लामा नें खुद अपने जीवन में भी महसूस किया है. एक बार जब दलाई लामा बौद्ध धर्म के सबसे पावन स्थल बोद्ध गया में अपने कार्यक्रम में जा रहे थे तो उनके पेट में अचानक बहुत तेज़ दर्द हुआ उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, वो दर्द से कराह रहे थे कि तभी उनकी नज़र सड़क पर पड़े एक बीमार बूढ़े व्यक्ति पर पड़ी जो लगभग मरने की कगार पे था. उसे देख दलाई लामा को लगा कि मेरा दर्द तो इसके दर्द के सामने कुछ भी नहीं है और वो कुछ समय के लिए अपना तीव्र दर्द भूल गए. The Book of Joy

आपका दर्द कितना जटिल है ये उसके प्रति आपके रवैये पर निर्भर करता है.

समस्या चाहे जितनी भी जटिल हो और दर्द चाहे जितना भी बड़ा हो अगर आपका इरादा और मानसिकता मजबूत है तो आप बड़े से बड़े तूफ़ान का सामना आसानी से कर लेंगे, लेकिन अगर आपका मन ही कमजोर पड़ जाए तो दर्द का एक झोका ही आपकी ज़िन्दगी तबाह करने के लिए काफी है. ऐसा ही कुछ संदेश लेखकों नें अपनी इस किताब के जरिये दिया है.

एक मजबूत मानसिकता से आपको दर्द में भी ख़ुशी ढूंडने का साहस मिलता है. लेखकों का कहना है कि दर्द और दुःख जीवन के अभिनन्न अंग हैं, इसलिए इनसे लड़ने की बजाये उस पल में ही ख़ुशी का कोई लम्हा ढूंडने की कोशिश करना ही समझदारी है. कभी भी परिस्थितियों को अपने सुखी जीवन पर हावी न होने दें, मन में मुस्कान ले कर सोचें की ये वक़्त का खेल है आज नहीं तो कल बदल ही जाएगा.

इन बातों को और गहरायी से समझाने के लिए दोनों लेखकों ने अपने-अपने जीवन से एक उदाहरण दिया है. जहाँ एक ओर दलाई लामा ने बताया कि कैसे एक बार उनकी और उनके मित्र और फ़िल्मकार पेगी कैल्लाहन (Peggy Callahan) की फ्लाइट रद्द हो जाने के कारण उन्हें वहाँ से 6 घंटे की दूरी पर स्थित एअरपोर्ट जाना पड़ा, लेकिन इस परिस्थिति में झुंझलाने की बजाये उन्होंने अपने 6 घंटे के रोड ट्रिप को हँसी मजाक के पलों में तब्दील कर लिया. वहीँ दूसरी ओर डेस्मंड टूटू का कहना है कि अपनी युवावस्था में वो अक्सर ट्रैफिक में फँस कर क्रोधित हुआ करते थे लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ की उनके दांत मसल कर गुस्सा होने से कुछ नहीं बदलेगा इसलिए उन्होंने ट्रैफिक जाम के दौरान प्रार्थना करने का निर्णय लिया. उसके बाद से आज तक ट्रैफिक की समस्या नें उन्हें कभी नहीं सताया.

इसी प्रकार हम भी जीवन की हर कठिनाई को एक प्रेरणा और अवसर के रूप में देख सकते हैं, लेकिन वो कहते हैं न कि कहना आसान होता है लेकिन करना कठिन इसलिए लेखकों ने कठिन समस्या में खुद को मजबूत बनाये रखने के लिए कुछ आसान से तरीके बताये है जिनसे हम आगे के सबकों में रूबरू होने. The Book of Joy

एक गुस्सैल व्यक्तित्व के पीछे ज्यादातर टूटी हुई उम्मीदों होती हैं, ऐसे में किसी अपने का साथ मरहम की तरह साबित हो सकता है.

आज के बदलते परिवेश में हमारी ज़िन्दगी में रोज़ एक नयी उम्मीद सामने आ जाती है कभी एक अच्छे करियर की उम्मीद, कभी अच्छे घर, अच्छी जीवनशैली कभी कुछ तो कभी कुछ, इन उम्मीदों को पूरा करने की दौड़ में हम दिन रात जुटे रहते हैं. गलती उम्मीदों की नहीं है लेकिन असल समस्या तो तब आती है जब उम्मीदें टूट जाती है, एक के बाद एक टूटती उम्मीदों से इंसान इतना डर जाता है कि उसका जीवन भी उम्मीदों के साथ ही बिखर जाता है.

धीरे धीरे ये डर गुस्से का रूप लेकर व्यक्ति के मन में बैठ जाता है, और उसका गुस्सा कभी अपनों पर तो कभी समाज पर फूटता रहता है.

इसलिए दलाई लामा कहते हैं कि उम्मीदों के टूट जाने पर किसी के द्वारा दिखाया गया थोडा सा प्यार व्यक्ति को संभलने में उसकी मदद कर सकता है. इसके उदहारण स्वरुप उन्होंने अपने जीवन की एक घटना बताते हुए कहा है की पॉल एकमन (Paul Ekman) नाम के एक वैज्ञानिक से उनकी मुलाक़ात माइंड एंड लाइफ नाम की एक संस्था द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हुई. उन्हें पता चला की पॉल बड़े ही गुस्सैल स्वभाव के व्यक्ति हैं क्यूंकि उनके पिता काफी आक्रामक थे जिसके कारण उनकी माँ ने आत्महत्या कर ली थी उनके जीवन का ये सच आज भी उनके जेहन में घूम रहा था.

जब दलाई लामा उनसे मिले तो उनके हाथ को हाथ में लेकर उनकी आँखों की गहरायी में बडे ही प्यार से झाँका, उस एक झलक ने पॉल के मन में बसे गुस्से के ज्वालामुखी को शांत कर दिया. The Book of Joy

जिस तरह प्यार और सद्भावना के जरिये हम लोगों से जुड़ सकते हैं उसी तरह हमारा दुःख भी हमें दूसरों से जोड़ता हैं. जब भी हमें कोई ऐसा व्यक्ति मिलता है जिसका दुःख हमारे जैसा है तो अपने आप ही उसके प्रति दिल में सहानुभूति आ जाती है और तो और कई बार दुःख हमें लोगों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना देता है.

एक वैज्ञानिक संस्था के द्वारा किये गए शोध से भी यही पता चलता है कि जो लोग जीवन में किसी बड़े हादसे से गुजरे होते हैं उनके दिल ज्यादा नर्म होते हैं, और जिन्होंने कभी कोई तकलीफ देखी ही नहीं उन्हें किसी दुसरे की तकलीफ का एहसास भी कम ही होता है. इसलिए लेखकों का कहना है कि अपनी तकलीफों को दूसरों से जोड़ कर देखें तो टूटी हुई उमीदों का दर्द भी काफी कम हो जाएगा.

अकेलापन और इर्ष्या – ज़िन्दगी तबाह करने के लिए ये दोनों ही काफी हैं.

सच ही कहते हैं कि इंसान एक सामाजिक प्राणी है. इसलिए शायद जब किसी व्यक्ति को अकेलापन सताता है तो उस अकेलेपन से उबर पाना उसके लिए बहुत मुश्किल हो जाता है जिसके कारण न जाने कितनी ही मानसिक बीमारियाँ जन्म लेती है.

चूँकि प्रकृति ने एक इंसान को दुसरे का पूरक बनया है तो कोई भी व्यक्ति अकेले ही काफी होने का दावा नहीं कर सकता. इसलिए लेखकों की सलाह है कि हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ जुड़ना चाहिए लेकिन इसमें जो सबसे बड़ी समस्या आती है वो है विश्वास की कमी. आज के युग में व्यक्ति इतना स्वार्थी हो गया है कि उसे खुद से ज्यादा और किसी पर विश्वास नहीं है, नतीजन गिने चुने लोगों को ही वो अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बना पाता है.

लेखकों का कहना है कि जो व्यक्ति ‘मै’, और ‘मेरा’ के चक्करों में ज्यादा पड़े होते हैं वो आमतौर पर अकेलेपन का शिकर होते हैं और ह्रदय और मानसिक बीमारियाँ भी ऐसे ही लोगों में ज्यादा पायी जगी हैं. The Book of Joy

अकेलेपन के बाद दूसरी सबसे बड़ी दिक्कत है इर्ष्या. इर्ष्या तो एक ऐसी भावना है जो इंसान ही नहीं बल्कि जानवरों में भी देखी जा सकती है. ईर्ष्यावश लोग अपनी थाली की रोटी के लिए इश्वर का धन्यवाद करने की बजाये किसी और की ज्यादा भरी थाली देखकर ज्यादा जलते हैं. और यही जलन आगे चलकर गुस्से और डर का कारण बनती है.

इर्ष्या के चलते लोग क्या कुछ नहीं कर जाते. लेकिन इर्ष्या तो एक स्वाभाविक भावना है जिसपर हमारा वश नहीं चलता, लेकिन बस जरुरत है तो इस भावना को ज्यादा पनाह न देने की. अगर आपको किसी के प्रति इर्ष्या हो भी रही है तो उसके बारे में ज्यादा ना सोचें और इस इर्ष्या को सकारात्मक मोड़ देते हुए अपनी प्रगति में लगायें.

कई बार मौत के मुँह में जाकर ही जीवन का मूल्य पता चलता है.

इंसान का ऐसा स्वभाव है कि जो चीज़ उसे आसानी से मिल जाती है उसका कोई मोल नहीं करता लेकिन जब वही चीज़ उसके हाथों से फिसलते-फिसलते बचती है तब उसे उसका मोल समझ आता है. अब जीवन को ही ले लीजिये जब व्यक्ति एक स्वस्थ जीवन जी रहा होता है तो धुम्रपान, शराब और लड़ाई झगडे इन सब में पड़ कर अपना बहुमूल्य समय बर्बाद करता रहता है. लेकिन जब वही व्यक्ति किसी बीमारी या हादसे के कारण मौत के मुँह में जाते जाते बचता है तब उसे ये एहसास होता है कि जीवन का असली अर्थ क्या है.

अब हमारे देश की आजादी को ही ले लीजिये जब अंग्रेजों की 200 साल की गुलामी के बाद हमें आज़ादी मिली तो उन दिनों उस आज़ादी की कीमत देश के हर एक व्यक्ति को पता थी, इसलिए जब पहली बार चुनाव हुए तो अपना प्रतिनिधि चुन पाने की ख़ुशी में सबने अपने घरों से मीलों पैदल चलकर भी वोट डाले. वहीँ अगर हम आज की बात करें तो वातानुकूलित गाड़ियाँ होने के बाद भी देश में लगभग आधे लोग वोट डालने नहीं जाते क्यूंकि उन्हें इस आजादी का महत्त्व नहीं पता. The Book of Joy

इस बात का एक उदहारण दलाई लामा ने भी पेश किया है उनका कहना था कि जब चीन में सांकृतिक क्रांति आई तो वहां के लोगों नें तिब्बती संकृति का सफाया करने की ठान ली. तिब्बती भाषा में लिखे सारे ग्रंथों और किताबों को नष्ट कर दिया गया. उसी दौरान दलाई लामा वहाँ से भाग कर भारत आ गए यहाँ आकर उन्होंने तिब्बती संकृति के बचे अंशों को संजोया और हर एक किताब को देखकर उन्हें जो ख़ुशी महसूस हो रही थी वो उन्हें पहले कभी महसूस नहीं हुई.

ठीक इसी प्रकार डेस्मंड टूटू नें भी बचपन में कई बार जान लेवा बिमारियों का सामना किया था यहाँ तक कि जब उन्हें टी.बी की बीमारी लगी तो हालात ऐसे हो गए कि उनके पिताजी नें ताबूत की लकड़ियाँ भी इक्कठा करना शुरू कर दी, लेकिन इन सब बिमारियों से लड़ कर भी वो जीवित रहे. इन बिमारियों ने कई बार मौत से उनका सामना करवाया और मौत से हुई इन मुलाकातों नें उन्हें एक जीवंत इंसान बना दिया.

इसलिए लेखकों का मुख्य उद्देश्य ये समझाने का है कि जीवन बहुत बहुमूल्य है इसलिए जरुरी नहीं कि इसे खोकर ही इसकी कीमत समझी जाए, जो व्यक्ति इसकी कीमत समझ गया समझो उससे ज्यादा खुशकिस्मत कोई नहीं.

इंसानियत की भावना और जीवन के प्रति आपका नजरिया, दिल में सच्ची ख़ुशी और शांति को जन्म देता है. The Book of Joy

लेखकों का कहना है कि जीवन में खुशियाँ प्राप्त करने के लिए 8 स्तंभों की जरुरत होती है. इन स्तंभों को अपने जीवन में उतारने से पहले जरुरी है कि आप अपने मन से सभी प्रकार की चिंताएं और डर को निकल बहार करें. एक बार आप चिंतामुक्त हो गए उसके बाद आप खुशियों के स्तभों को जीवन में लाकर हर्षोउल्लास के रास्ते का आनंद ले सकते हैं. Amazing Facts in Hindi

लेखकों द्वारा बताया गया सबसे पहला स्तम्भ है जीवन के प्रति हमारा नजरिया. अगर हम अपने नज़रिए और सोच को बड़ा रखते हैं तो किसी भी माहौल में खुश रहना आसान हो जाता है. जैसे कि अंग्रेजों के शाशन में जब आज़ादी के दीवाने जेल में डाल दिए जाते थे तब उनके माथे पर जरा सी भी शिकन नहीं आती थी, चाहे कितनी भी यातनाएं क्यूँ न सहनी पड़े वो हमेशा मुस्कुराते रहते थे.

ऐसा इसलिए क्यूंकि उन्हें अपनी मौत नहीं बल्कि देश के लिए अपना बलिदान दिखाई देता था. इसलिए कहा जाता है कि अगर सोच बड़ी हो तो पहाड़ भी सर झुका देता है. एक मरते हुए व्यक्ति के पास अगर जीने की वजह हो तो वो मौत के मुँह से वापस आ सकता है और वहीँ अगर एक जीवित व्यक्ति मन में सोच ले कि सब खत्म हो गया है तो उसकी मृत्यु निश्चित है.

नजरिये के साथ साथ दूसरा स्तम्भ है इंसानियत का. जब आप हर व्यक्ति से छोटा बड़ा या अमीर गरीब होकर नहीं बल्कि एक इंसान बनकर मिलते हैं तो उससे जुड़ना बहुत आसान हो जाता है और उससे आपकी ख़ुशी दुगनी हो जाती है.

इसका एक बेहतरीन उदहारण दलाई लामा जी ने अपनी किताब में पेश किया है, उनका कहना है कि जब उन्होंने धर्म गुरु के रूप में बोलना शुरू किया तो उन्हें अपने वक्तव्य के दौरान बहुत डर लगता था, बाद में उन्हें एहसास हुआ कि चूँकि वो खुद को बाकियों से ऊपर एक धर्म गुरु के रूप में समझते है इसलिए उन्हें डर लगता है.

उसके बाद उन्होंने खुद को भी एक आम इंसान के रूप में समझना शुरू किया, फिर क्या था उसके बाद वो अपने मन की बात आसानी से सबके सामने रखने लगे और दुबारा कभी भी उन्हें डर नहीं लगा. Amazing Facts in Hindi

परिस्थिति चाहे जैसी भी हो उसे आपनाकर, उसमें हास्य बनाये रखने से कठिन समस्या भी आसानी से सुलझ जाती है. The Book of Joy

एक अच्छा मजाक किसी भी जटिल से जटिल परिस्थिति में भी हँसी का एक लम्हा दे सकता है. यही हास्य ख़ुशी के मार्ग का तीसरा स्तम्भ है. लेखक डेस्मंड टूटू जीवन में हास्य की महत्वता बताते हुए कहते हैं कि एक बार उन्हें एक ऐसी जगह बोलने के लिए बुलाया गया जहाँ दो गुटों में मनमुटाव के कारण काफी झगडा चल रहा था.

ऐसी नाजुक परिस्थिती में लेखक नें हास्य का सहरा लेते हुए अपने वकतव्य के दौरान एक ऐसी कहानी सुनाई जिसे सुन कर दोनों गुटों के लोग खुद को हँसने से रोक नहीं पाए. लेकिन इस हास्य के साथ साथ उनकी कहानी में लडाई न करने की सीख भी शामिल थी. तो ऐसे डेस्मंड टूटू नें एक जटिल समस्या को हास्य का सहरा लेकर आसानी से सुलझा दिया.

हास्य के माध्यम से बड़ी से बड़ी बात आसानी से कही जा सकती है और साथ ही साथ हँसने से हमारे शरीर में ऐसे रसायन निकलते हैं जो हमारे शरीर को हल्का महसूस करवाते हैं और दिमाग में ख़ुशी की लहर पैदा करते हैं. इसलिए जिंदगी में हमेशा याद रखें कि एक सफल जीवन के लिए हसें और हसाएं.

चौथा स्तम्भ है परिस्थितियों को अपना लेना. यानी चाहे जीवन में सुख आये या दुःख आप ये मान लें कि ये दोनों जीवन चक्र का ही एक हिस्सा है. जिस प्रकार गुलाब के फुल में खुशबू के साथ साथ कांटें भी होते हैं ये जान कर भी हम उसे पसंद करते हैं उसी तरह जीवन के काँटों को अपना कर हम उसकी खुशबू का आनंद ले सकते हैं.
उदहारण स्वरुप अगर आपके ऑफिस में आपके बॉस से आपकी कम बनती है तो ऐसी पारिस्थि में आपके पास 2 रास्ते होते हैं या तो आप हमेशा उसे कोसते रहें और खुद को दुखी करें, या फिर आप बॉस के साथ अपने संबधों को अच्छा करने की कोशिश कर सकते हैं.

लेकिन ऐसे में सबसे जरुरी बात ये है कि आप ये बात अपने दिल में बिठा लें कि आपका बॉस आपके बारे में जो सोचता है आप उसे बदल नहीं सकते बस संबंध सुधारने की कोशिश ही आपके हाथ में है उसमें कितनी कामयाबी मिलेगी ये आपके हाथ में नहीं है. The Book of Joy

जो बात आपके हाथ में नहीं उसे स्वीकार लेने में ही भलाई है.

क्षमा और आभार को हमेशा अपने जीवन का हिस्सा बना कर रखें. The Book of Joy

रोज़ सुबह आंखें खोलने के साथ ही सूरज की गर्म रौशनी हमारे जीवन में उजाला लती है, प्रकृति की गोद में हमें खान पान का वैभव मिलता है, लेकिन क्या हम इन सबके लिए इश्वर के शुक्रगुजार होते हैं, ज्यदातर लोग नहीं क्यूंकि आसानी से मिल जाने वाली चीजों का हमारे जीवन में कोई मोल नहीं है.

एक बाल्टी पानी को हम यूँ ही बहा देते हैं जबकि देश के कई कोनों में लोग पीने के पानी तक के लिए मीलों पैदल चलते हैं. इसलिए लेखकों का कहना है कि चाहे सौगात छोटी हो या बड़ी आभार व्यक्त करना बहुत अहम् है. चाहे आभार इश्वर के लिए हो या किसी अपने के लिए एक बार हम आभार व्यक्त करना सीख गए तो हमें छोटी बड़ी सब चीज़ों का मोल पता चल जाएगा और खुशियाँ हमारे जीवन में खुद ब खुद आ जाएँगी.
सुखी जीवन का अगला स्तम्भ है क्षमा दान.

अगर कोई व्यक्ति आपके साथ कुछ गलत करता है और उसे अपनी गलती का एहसास हो जाए तो उसे माफ़ कर देने में ही सबकी भलाई है क्यूंकि जब तक माफ़ करके जीवन में आगे नहीं बढ़ेंगे तब तक पुरानी बातों को भुला कर एक नए जीवन की शुरुआत नहीं कर पाएंगे. The Book of Joy

क्षमा की भावना कैसा चमत्कार कर सकती है इसका एक उदहारण हमें केरला की एक नन रानी मारिया के हत्या कांड से मिल सकता है, इस केस के मुख्य आरोपी समंदर सिंह को रानी मारिया के परिवार नें ना सिर्फ माफ़ कर दिया बल्कि उसे अपने परिवार का एक सदस्य भी मान लिया.

ये देख कर समंदर सिंह जैसा हैवान भी एक कोमल ह्रदय का व्यक्ति बन गया और उसनें अपना बाकी का जीवन रानी मारिया के समाज सेवा के सपने को पूरा करने में लगा दिया. वहीँ दूसरी तरफ समंदर सिंह को पाकर रानी के परिवार को भी अपना गम भुलाने में आसानी हुई.

इसलिए लेखकों का कहना है कि जहाँ एक ओर हमें रोज़ इश्वर का आभार मानते हुए अपने दिन की शुरुआत एक मुस्कराहट से करना चाहिए वहीँ दूसरी ओर जो भी बुरा समय या बुरी घटना आपके साथ हो उसे भुला कर और क्षमा दान देते हुए खुशियों के रास्ते पर निकल पड़ना चाहिए.

दूसरों के प्रति प्रेम और सौहाद्र की भावना रखने से जीवन खिल उठता है. The Book of Joy

क्या आपके जीवन में कभी ऐसा कोई पल आया है जब आपकी वजह से किसी के चेहरे पर मुस्कान आई हो, और उसकी मुस्कान को देख कर आप अपना दुःख दर्द सब भूल गए हों. अगर सच में आपने ऐसा कोई पल जीया है तो आपको यक़ीनन पता होगा कि कैसे दूसरों के प्रति दयालुता दिखाने से हमें एक अजीब सी आंतरिक ख़ुशी और सुकून का एहसास होता है. कई वैज्ञानिकों नें भी अपने शोध में ये बात साबित की है कि एक दुसरे के प्रति दयालुता की भावना मानव जाती के अस्तित्व का मूल उद्देश्य है और इसके बिना मानव जाती का पतन होना निश्चित है.

वैज्ञानिकों की शोध में ये भी पता चला कि जब भी हम किसी के प्रति दया भावना से सोचते हैं तो हमारे शरीर में इंडोरफिन (endorphin) नाम का एक रसायन निकलता है जो हमें वैसी ही खुश का एहसास दिलाता है जैसा की अपना मनपसंद काम करने से मिलता है. तो चाहे आप किसी पर दया करें या कोई आपका हाथ पकड़ कर कहे कि कोई बात नहीं सब ठीक हो जाएगा, संतुष्टि और सुकून दोनों को मिलता है

क्यूंकि ये एक दो तरफ़ा सिस्टम है जहाँ एक की आँखों का सुकून दुसरे की आँखों की ख़ुशी बन जाता है. इसलिए लेखकों का मानना है की स्वाभाव में हमेशा दयालुता रखना खुशियों का सातवाँ स्तम्भ है.
आठवां और आखरी स्तम्भ है दूसरों की मदद करना. अगर आप समर्थ है आपके पास रुपया पैसा अच्छा घर सब है लेकिन सुकून नहीं तो ये सारी दौलत किसी काम की नहीं है.

इसलिए लेखकों का कहना है की अगर आप अपनी दौलत के कुछ हिस्से से किसी जरूरतमंद की मदद करते हैं तो आपको ऐसी ख़ुशी महसूस होगी जैसी पहले कभी नहीं हुई हो.

भारतीय सिनेमा के महानायक नाना पाटेकर को तो आप जानते ही होंगेवो अपनी आधी से ज्यादा कमाई क़र्ज़ तले दबे किसानों के परिवार की मदद में लगा देते है. खुद वो मात्र एक बेड रूम के फ्लैट में अपनी माँ के साथ रहते हैं. जब किसी पत्रकार ने उनसे पूछा कि वो जीवन के ऐशो आराम को छोड़ समाज सेवा में क्यूँ लग गए तब उनका कहना था कि रुपया पैसा ऐशो आराम ये सब उन्हें वो नहीं दे सकता था जो सेवा नें उन्हें दिया और वो चीज़ थी मरते दम तक जीने की एक वजह. ऐसी ही कई प्रेरणादायी कहानियाँ हमें अपने आस पास देखने को मिलती है जिसे देख कर ये लगता है कि खुद के लिए जीया तो क्या जीया सच्चा जीवन तो वो है जो किसी की मदद कर बीता हो. The Book of Joy

कुल मिला कर

दर्द और तकलीफों से भरी इस दुनिया में ख़ुशी और सुकून का मार्ग थोडा कठिन जरुर है लेकिन एक बार आपने इस पर चलना सीख लिया तो खुशियाँ आपके दामन में समां जाएँगी. ख़ुशी और सुकून के लिए जरुरी है कि आप अपना ध्यान खुद से हटा कर परोपकार और दया में लगायें ताकी दूसरों के दर्द को दूर कर आपका अपना दर्द भी दूर हो जाए.

क्या करें?

मरने का अभ्यास रोज़ करें
जब भी आप ध्यान साधना करते है तो अपने अंतर मन में रोज़ इस बात की कल्पना करें कि मृत्यु एक सच है और हर वो चीज़ जो जीवित है उसका अंत निश्चित है. रोज़ जीते हुए मरने का अभ्यास कर आप जीवन में हर प्रकार के डर और चिंता से मुक्त हो जाएँगे. और फिर जब मौत सच में आएगी तो आप हँसते-हँसते उसका दामन चूमने को तैयार हो जाएँगे.

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