Interesting facts in Hindi about the subconscious mind

Interesting facts in Hindi subconscious mind 

 

सबकॉन्शियस माइंड हमारे दिमाग के अंदर जो दुनिया है उसे इंसान आज भी नहीं समझ पाया है।और दिमाग हमारे लिए बिल्कुल भी अनजान है।आपके दिमाग के अंदर पूरा का पूरा एक इंफॉर्मेशन सेट मौजूद है। जिसके अंदर  दुनिया के बारे  मे जानकारी मौजूद है। जी हां आपके दिमाग के अंदर इस पूरी दुनिया की जानकारी है। साइन यानी विज्ञान हमारे ब्रेन को समझने की कोशिश कर रहा है। उसे रिवील करने की कोशिश कर रहा है। और कुछ हद तक विज्ञान इसमें कामयाब को भी पाया है।

और अभी तक तो यही पता चला है कि आपके ब्रेन के अंदर इमेंस पावर मौजूद है। जिसके बारे में आपको पता भी नहीं है और जिसका इस्तेमाल करके आप लाइफ में आगे बढ़ सकते हो आपके दिमाग का जो दूसरा पार्ट है। सचेत मन के बाद जो आपका अवचेतन मन है यानी सबकॉन्शियस माइंड जो है।वह तो वैज्ञानिकों को भी हमेशा से हैरान करते आया है।आपके डर का आपके इच्छाओं का आपके ड्रीम्स का आपके बॉडी लैंग्वेज का आपके बिहेवियर का आपके मेंटल स्टेट का इन सब का सोर्स आपका सबकॉन्शियस माइंड ई है।

अगर आप इस सबकॉन्शियस माइंड को अच्छे से समझ गए तो आप ज्यादा स्मार्ट और ज्यादा इंटेलिजेंट ज्यादा हेल्दी ज्यादा क्रिएटिव और ज्यादा मोटिवेटेड भी बन सकते हो आप के जितने भी सेंसस है।इयररिंग, विजन, टचयह सब एक साथ एक परफेक्ट हारमोनी में काम करती है। और इस आपका सबकॉन्शियस माइंड ही बांध के रखता है।हमारे दिमाग में ऐसी कई प्रोसेसेस होती है। जो कि हमेशा चलते रहती है। दिमाग के अंदर जिनके बारे में हम लोग कुछ नहीं जानते क्योंकि वह सबकॉन्शियस लेवल पर होती है। आपका सबकॉन्शियस माइंड पर्दे के पीछे लगातार काम कर रहा होता है।

बॉडी लैंग्वेज। Body language. |Interesting facts Hindi subconscious

बॉडी लैंग्वेज के बारे में आपने सुना ही होगा बॉडी लैंग्वेज जो है ना वह आपके सबकॉन्शियस माइंड की भाषा होती है। आपके आसपास के लोगों पर इसका बहुत गहरा असर होता है।जैसे एक इंसान एक रूम में बैठा हुआ है। जस्ट उसके बैठे रहने से उसका एक प्रजेंट फील होता है। एक वाइब फील होता है। उस इंसान से उस इंसान के बारे में अगर कोई चल रहा है उसके चलने की स्टाइल से कुछ फील होता है। हमें कि यह इंसान कैसा होंगा अगर मैं मुंह टेढ़ा करके फैक्ट बताऊ आपको कैसी फीलिंग आएंगी तो किसी इंसान के वाइब को आपका सबकॉन्शियस माइंड आपको फील करने में मदद करता है।

तो मेकअप मेकओवर के थ्रू इंसान कॉन्शियसली अच्छे तो दिखते हैं। बट लेकिन जो रियल फेक्टर होता है। ना नेशनल फेक्टर एक इंसान में रियल प्रेजेंस जोकि सबकॉन्शियसली फील होता है। लोगों को कॉन्शियसली नहीं सबकॉन्शियसली जो इंसान फील कर पाता है। जस्ट आपके वाइब से वह आपके बॉडी लैंग्वेज से ही पता चलता है। और जीन का माइंड हेल्दी होता है। जो एवरेज से ज्यादा इंटेलिजेंट होते हैं। जो हर एक चीज को स्मार्ट तरीके से देखने का आदत बना लिए हैं। बहुत दिन ब दिन और स्मार्ट और इंटेलिजेंट बनते जाते हैं। और उनसे अलग तरह का औरा आता है। एक वाइब आता है।

जो कि दूसरे लोग फील कर पाते है। और जो उस तरह के के लोग होते हैं उनका एक स्पेशल ही वाइब होता है।साइंस ने तो सबकॉन्शियस माइंड की ताकत को जस्ट अभी स्क्रैच करना शुरू किया है। अभी तो बहुत कुछ पता करना बाकी है। बैकग्राउंड कैलकुलेशन।ऐसे कई काम है जिन्हें आप ऑब्जर्व करोगे तो आप यह देखेंगे कि आप उस काम को आराम से कर लेते हो बट थोड़ा जूम आउट होकर उस काम को लॉजिकली देखोगे तब आपको लगेगा कि यह आप कैसे कर लेते हो जैसे जब आप अपने स्मार्टफोन में टाइप करते हो तब आप कितने फास्ट टाइप कर लेते हो आपके दिमाग में बैठा हुआ है कि कौन सा की कहां पर है।

अगर मैं आपको A I R लिखने बोलूं तो आपको पता होता है कि हां A यहां है I यहां है और R यहां है। आपके मन में यह बात आएगा यह तो मेमोरी के चलते होता है ना मेमोरी में बैठा हुआ है हां कि A यहां है बट मेमोरी तो आपको याद करने में मदद करती है याद रखने में मदद करता है यह कि यहां पर है बट आपके हैंड का मूवमेंट आपके टाइप करने का मोटिवेशन आप क्यों टाइप कर रहे हो उस चीज को और यह टाइप करने से क्या गोल अचीव होगा क्या फन होगा इसमें यह सारा कैलकुलेशन यह सारा हार्ड काम अनकॉन्शियसली बैकग्राउंड में आपका सबकॉन्शियस माइंड कैलकुलेट कर रहा होगा और इसके बाद आप एक्शन लेते हो मतलब हैबिट के चलते हार्ड काम भी इजी हो जाता है। 

क्योंकि उसमें आपका सबकॉन्शियस माइंड ऑटोमेटिक उस चीज को कराने लगता है। बेनिफिट्स आपके बैकग्राउंड में कैलकुलेट होता है। जैसे आप कमेंट सेक्शन में कुछ टाइप कर रहे हो तो बैकग्राउंड में आपके दिमाग में सबकॉन्शियस माइंड यह कैलकुलेट कर रहा होगा कि मैं कमेंट में टाइप कर लूंगा और उसे पूरी दुनिया पढ़ेंगे मेरी ओपिनियन पूरी दुनिया रीड कर सकेंगे बट फास्ट टाइप करते समय यह सब बातें आप दिमाग में लॉजिकली रखते हो ” यह का, वह होगा” आप जस्ट करते हो ऑटोमेटिक सिर्फ टाइपिंग ही नहीं यह तो जस्ट एग्जांपल था। Interesting facts in Hindi about subconscious mind

लाइफ में ऐसी कई चीजें है इस टाइप का जिन्हें डांस आता है। वह मक्खन की तरह डांस कर लेते हैं तो टाइपिंग की बात करें तो कमेंट टाइपिंग का जो पीछे का लॉजिकली मोटिवेशन होता है वह वही होता है। लोगों तक अपनी बात को पहुंचाना मतलब किसी भी काम में फ्लूडिटी एक मक्खन की तरह करना यह इसके पीछे आपके अनकॉन्शियस माइंड का ही काम होता है। क्योंकि तब आप लॉजिकली नहीं सोच रहे होते हो जस्ट हो रहा होता है। लाइक डांस मूव या कुछ भी

डिफॉल्ट मॉड नेटवर्क। Default Mode Network. Interesting facts Hindi subconscious 

डॉक्टर मार्कस रेचल जोकि यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन इन सैंट लुइ मिसौरी के एक न्यूरोलॉजिस्ट है। उन्होंने साल 2001 में दिमाग के बारे में एक बहुत ही गजब चीज को पता किया आप जब भी कोई काम को स्टार्ट करते हो तब आपके दिमाग का कुछ पाठ एक्टिव होने लगता है। जब आप कोई दूसरा काम कर रहे होते हो तो उसके अकॉर्डिंग्ली उस काम में जो ब्रेन पार्ट्स यूज़ होते हैं। वह सब ऑन हो जाते हैं। और उसके रिस्पेक्टिव कई पार्ट्स ऑफ होजाते हैं। मतलब कुछ स्पेसिफिक काम पर डिपेंड करता है। आपके दिमाग का कौन सा हिस्सा ऑन है। Interesting facts  Hindi  subconscious mind

बट डॉक्टर मार्कस ने यह डिस्कवर किया जब आप एक जगह बैठे होते हो मेडिटेशन में तब भी आपके ब्रेन के कई पार्ट्स ऑन और फुल्ली एक्टिव रहते हैं और मार्कस ने उन पार्ट्स को कलेक्टिवली एक नाम दिया डिफॉल्ट मोड नेटवर्क असल में इस डिफॉल्ट मोड में भी जब आप शांत होकर एक जगह बैठते हो मेडिटेक कर रहे होते हो थॉट्स बिल्कुल कम रहते हैं। तब भी आपका दिमाग उतना ही एनर्जी कंज्यूम करता है। और उतना ही एक्टिव रहता है जितना तब होता है।जब आप कॉन्शियसली कोई काम को कर रहे होते हो मतलब आपका दिमाग टेक्निकली कभी ऑफ नहीं होता सोने के टाइम पर भी नहीं और जब से आप जन्म लिए हो तब से लेकर आज तक इतने सालों से लगातार बिना 1 सेकंड चुके आपका दिमाग ऑन ही है। Interesting facts in Hindi subconscious mind

और एक्टिवली काम करते आ रहा है जब भी कोई थॉट्स आपके दिमाग में आती है। जैसे अभी कोई थॉट आपके दिमाग में आई तो आपको लगेगा कि वह थॉट आपके दिमाग में अभी आई है। ना बट वो आपके सबकॉन्शियस माइंड में अंदर ही कुछ सेकंड पहले आ चुकी थी। आप मेरा आर्टिकल पढ़ रहे हो ठीक है। लेकिन अभी भी आपके सबकॉन्शियस माइंड में कुछ चीजें चल रही है। जिसके बारे में आप अवेयर नहीं हो फिर थोड़ी देर बाद वह चीज आपके कॉन्शियस माइंड में आ जाएगा आपका सबकॉन्शियस माइंड आपसे दो कदम आगे ही रहता है। क्या आपको किसी भी सिचुएशन में ऐसा लगा है कि कुछ गड़बड़ है। या कुछ अच्छा होने वाला हम सबको ऐसा लगता है।

या फिर हम जो वाइब की बात कर रहे हैं। गुड वाइब्स, बेड वाइब्स इस इंसान से पॉजिटिव वाइब्स आ रहा है। इस इंसान से नेगेटिव वाइब्स आ रहा है। यह सब फिलिंग्स आखिर कहां से आती है तो इसका आंसर है। वह सब फीलिंग आपके सबकॉन्शियस माइंड का एक मैसेज होता है। अगर कोई इंसान गुड होगा तो आपको पता चल जाएगा कि हां यह गुड है अगर बेड होगा तो आपको फील हो जाएगा कि यह बेड है।

नो डिफरेंट बिटवीन रियलिटी एंड इमेजिनेशन No Difference Between Reality and Imagination.

आपका कॉन्शियस माइंड और सबकॉन्शियस माइंड मैं आपका ज्यादा पावरफुल आपका सबकॉन्शियस माइंड है। इस बात को आप एक चीज से प्रूफ कर सकते हो जो आपका सबकॉन्शियस एक्सपीरियंस है वह आपके कॉन्शियस एक्सपीरियंस से ज्यादा पावरफुल है। जब आप कोई मूवी देखते हो तब आपको कॉन्शियसली पता होता है। कि यह जस्ट एक मूवी है एक ड्रामा है एक नकली इन्वायरमेंट है। बट तब भी आपको वैलेंस पर गुस्सा आता है।

हीरो को शाबाशी देते हो और इमोशनल मोमेंट्स में रोते हो और कॉमेडी मोमेंट्स में हंसते हो क्योंकि वह सब आपके सबकॉन्शियस माइंड के लिए असल एक्सपीरियंस होता है। एक सच्ची एक्सपीरियंस होती है। आपके लॉजिकल और कॉन्शियस माइंड के लिए तो नकली ड्रामा मूवी चल रहा है। बट आपके सबकॉन्शियस माइंड के लिए एक रियल एक्सपीरियंस तभी आपको डर हैप्पीनेस इमोशंस ऐसी चीजों का एक्सपीरियंस होता है।

यूज सबकॉन्शियस माइंड टू ग्रो इन लाइफ। Use subconscious mind to grow in life.

तो इससे यह पता चलता है ।अपने सबकॉन्शियस माइंड को अपने फायदे के लिए यूज कर सकते हो उससे आपकी रियल दुनिया में पॉजिटिव चेंजेज देखने लगेंगे जिसे पॉजिटिव सोचना लॉजिकल सोचना इंटेलिजेंट तरीके से सोचना फ्यूचर को ध्यान में रखकर अभी के डिसीजंस को स्मार्ट ली लेना हमेशा काइंड ऑफ हैप्पी रहना यह सब काम आप करते रहते हो तो यह आपका हैबिट बन जाता है। और आपके सबकॉन्शियस माइंड में यह सब आदतें इंबैंड हो जाती है।

तो यह ऑटोमेटिक अली आपके लाइफ को इंप्रूव करने लगता है। अपने सबकॉन्शियस माइंड के पावर के जरिए आप लाइफ में बहुत ग्रो कर सकते हो जो मैंने बोला उसका मेन मतलब यही है। लॉजिकली एंड कॉन्शियसली जब आप लाइफ को स्मार्ट ली हैंडल करते हो तो एक टाइम के बाद तो आपकी लाइफ ऑटोमेटिक इंप्रूव होने लगती है। और आपको कोई अवार्ड नहीं लगाना पड़ता आपका सबकॉन्शियस माइंड उसी तरह ढल जाता है। इसलिए आपने वह कहावत सुनी है ना कि इस दुनिया में अमीर और अमीर बनते रहता है गरीब और गरीब होते जाते हैं। Interesting facts in Hindi subconscious mind

सबकॉन्शियस माइंड इस तरह के थॉट्स उस इंसान को दे रहा है उस पर उसकी लाइफ डिपेंड करती है और आप लाइफ में धीरे-धीरे करके स्मार्ट ली काम करते हो एक इंटेलिजेंट तरीके से अपने एंबिशन अपने गोल मुझे क्या बनना है। सोच लेते हो और एक-एक करके इंटेलिजेंट स्टेप्स लेते हो तो वह एक सीडी की तरह बन जाता है। और वह चीज आपको आपके लाइफ में और आगे ले जाती है बस जरूरी है एक इंटेलिजेंट और स्मार्ट माइंड सेट की

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